भारत में प्रधानमन्त्री आवास की डिजाइन PM awas design in india 2020

प्रधानमन्त्री आवास किस राज्य में किस तरह के डिजाइन का बनेगा।

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1. असम के लिए मकान का डिजाइन भूकंप को झेलने के लिए क्षैतिज आरसीसी बैंड के साथ आरसीसी की मदद से       आधी इंट जितनी मोटी दीवार वाले ईंट के मकान के डिजाइन का बनाया जायेगा।

 

2. छत्तीसगढ़ के लिए मकान का डिजाइन उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु वाली पहाड़ी श्रृंखला मैकाल-सतपुड़ा के पादगिरि से सटे क्षेत्रों के  डिजाइन का बनाया जायेगा।

 

3. हिमाचल प्रदेश के लिए मकान का डिजाइन लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिलों के लिए मकान के डिजाइन की तरह बनायी जायेगी.

4. झारखंड के लिए मकान का डिजाइन कच्ची ईंट की दीवार, आरसीसी छत और बरामदा के लिए बांस की छत के साथ झारखंड के लिए सामान्य आकार का मकान बनाया जायेगा।

5. मणिपुर के लिए मकान का डिजाइन बरामदायुक्त एल-शेप के मकान जैसा कि परंपरागत नागा जनजाति मकानों में उठे हुए फर्श के साथ-साथ लकड़ी की फ्लोरिंग वाले मकानों में होता है।

6. मेघालय के लिए मकान का डिजाइन खास, भोई और जतिया गांवों के लिए बांस इकरा की दीवार वाले ऊंचे बांस के मकान जैसा बनाया जायेगा।

7. उत्तर प्रदेश के लिए मकान का डिजाइन उत्तर प्रदेश में अधिक भूकंपी जोखिम और आंधी वाले क्षेत्रों में सपाट स्लैब बनाने के लिए नए फेरो सीमेंट चैनलों वाले डिजाइन की सिफारिश की गई है।

8.ओडिशा के लिए मकान का डिजाइन शहरी क्षेत्रों से सटे इलाकों के लिए उपयुक्त ऊर्जा विस्तारण के लिए सीढ़ी के साथ सपाट छत्त के आरसीसी फ्रेम वाले मकान का डिजाइन।

9. राजस्थान के लिए मकान का डिजाइन बाड़मेर, पाली, जोधपुर और जैसलमेर जिलों के लिए इस डिजाइन की सिफारिश की गई है।

10. छत्तीसगढ़ के लिए मकान का डिजाइन टेराकोटा छत और मिट्टी के गाड़ी वाले मकानों की डिजाइन।

11. उत्तर प्रदेश के लिए मकान का डिजाइन रैट ट्रॅप बॉन्ड पर फ्लाई ऐश का इस्तेमाल करते हुए बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए डिजाइन।

12. प. बंगाल के लिए मकान का डिजाइन उच्च तापमान वाले क्षेत्रों और भूकंपीय क्षेत्र 3 में आने वाले क्षेत्रों के साथ-साथ गंगा बाढ़ समतल क्षेत्र के लिए डिजाइन।

13. छत्तीसगढ़ के लिए मकान का डिजाइन दक्षिणी छत्तीसगढ़ में चौखंडी तरीके से बने प्रस्तावित डिजाइन ।

14. प. बंगाल के लिए मकान का डिजाइन हल्की निर्माण सामग्रियों का उपयोग करते हुए भूकंपी क्षेत्र 4 और 5 के लिए प्रस्तावित डिजाइन।

 

 

भारत में ग्रामीण आवास कार्यक्रम का इतिहास

 

स्वतंत्रता के तुरंत बाद शरणार्थियों के पुनर्वास हेतु देश में एक सार्वजनिक आवास कार्यक्रम शुरू किया गया। वर्ष 1960 तक भारत के विभिन्न भागों में लगभग 5 लाख परिवारों को मकान उपलब्ध कराए गए।

सामुदायिक विकास आंदोलन के भाग के रूप में वर्ष 1957 में एक ग्रामीण आवास कार्यक्रम  शुरू किया गया था जिसके अंतर्गत व्यक्तियों और सहकारिता समितियों को प्रति आवास 5,000 रू. तक का ऋण प्रदान किया गया 5वीं पंचवर्षीय योजना 1974-1979 के अंत तक इस योजना के अंतर्गत केवल 67,000 आवास ही बनाए जा सके थे। चौथी पंचवर्षीय योजना 1969-1974 में आवासों के लिए जमीन-सह-निर्माण सहायता योजना (एचएससीएएस) नामक एक अन्य योजना शुरू की गई जो वर्ष 1974-75 से राज्य क्षेत्र को अंतरित कर दी गई थी।

भारत में ग्रामीण आवास योजना की उत्पत्ति

भारत में ग्रामीण आवास योजना की उत्पत्ति राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम (एनआरईपी-1980) और ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम  के मजदूरी रोजगार कार्यक्रम से हुई थी क्योंकि इन कार्यक्रमों के अंतर्गत अनु, जाति/ अनु. ज.जा. और मुक्त कराए गए बंधुआ मजदूरों के लिए मकानों के निर्माण की अनुमति दी जाती थी। जून, 1985 में आरएलईजीपी की उप-योजना के रूप में इंदिरा आवास योजना शुरू की गई जिसमें अनुसूचित जातियों/ अनुसूचित जनजातियों और मुक्त कराए गए बंधुआ मजदूों के मकानों के निर्माण के लिए नीतियों का निर्धारण किया गया जब अप्रैल, 1989 में जवाहर रोजगार योजना (जेआरवाई) शुरू की गई थी तब इसकी 6 प्रतिशत निधियां अनुसूचित जातियों अनुसूचित जनजातियों और मुक्त कराए गए बंधुआ मजदूरों के मकानों के निर्माण के लिए आबंटित की जाती थीं। 1993-94 में जेआरवाई के अंतर्गत मकानों के लिए निर्धारित निधियां को बढ़ाकर 10 प्रतिशत करते हुए गैर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के परिवारों को भी इसमें शामिल किया गया। अतिरिक्त 4 प्रतिशत निधियों का उपयोग गैर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों के लिए किया जाना था।

जनवरी, 1996 से इंदिरा आवास योजना

Indira awas yojana
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जनवरी, 1996 से इंदिरा आवास योजना (आई.ए.वाई.) को एक स्वतंत्र कार्यक्रम बना दिया गया जिसका उद्देश्य बीपीएल परिवारों को मकान संबंधी जरूरतों को पूरा करना था। यद्यपि ग्रामीण आवास की कमी की पूर्ति हुई है, तथापि इसके क्रियान्वयन के 30 वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी कार्यक्रम के अंतर्गत, कवरेज के सीमित दायरे को देखते हुएग्रामीण आवास परिदृश्य में अभी भी बहुत कुछ किया जाना शेष है। ड़. वर्ष 2022 तक सभी को मकान उपलब्ध कराने के प्रति सरकार वचनबद्ध है। ग्रामीण आवास परिदृश्य में इस कमी को दूर करने तथा सरकार की इस प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए आईएवाई योजना को 01 अप्रैल, 2016 से प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के रूप में पुनर्गठित किया गया है। पीएमएवाई-जी की मुख्य विशेषताएं 2.1 लक्ष्य एवं उद्देश्य क. पीएमएवाई-जी के अंतर्गत सभी बेघर परिवारों और कच्चे तथा जीर्ण-शीर्ण मकानों में रह रहे परिवारों को 2022 तक बुनियादी सुविधायुक्त पक्का आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

 

सब के लिए घर

pm awas yojan sabke liye
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सब के लिए घर के उद्देश्य को पूरा करने के लिए वर्ष 2021-22 तक 2.95 करोड़ आवासों का निर्माण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अंतर्गत वर्ष 2016-17 से 2018-19 तक के तीन वर्षों में बेघर परिवारों या कच्चे/जीर्ण-शीर्ण मकानों में रहने वाले एक करोड़ परिवारों को लाभ पहुंचाना तथा स्थानीय सामग्रियों, डिजाइनों तथा प्रशिक्षित राज मिस्त्रियों का उपयोग करते हुए अच्छे मकानों के निर्माण में मदद करना है। मकान को घर बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं में तालमेल के माध्यम से पर्यावास दृष्टिकोण अपनाए जाने का प्रस्ताव है 2.2 पीएमएवाई-जी की मुख्य विशेषताएं क. वर्ष 2016-17 से 2018-19 तक तीन वर्ष की अवधि में ग्रामीण क्षेत्रों में 1,00 करोड़ आवास निर्माण के लिए सहायता उपलब्ध कराना ।

आवास निर्माण के लिए जगह को 20 वर्ग मीटर (आईएवाई के अंतर्गत) से बढ़ाकर 25 वर्ग मीटर किया जाना जिसमें स्वच्छ रसोई हेतु क्षेत्र भी शामिल है। ग. मैदानी क्षेत्रों में इकाई सहायता को 70,000 रू.से बढ़ाकर 1.20 लाख रू और पर्वतीयराज्यों, दुर्गम क्षेत्रों एवं आईएएस जिलों में 75,000 रु.से बढ़ाकर 1.30 लाख रू. करना। घ. केंद्र और राज्य सरकारों के बीच इकाई (आवास) सहायता लागत का वहन मैदानी क्षेत्रों में 60:40 के आधार पर तथा पूर्वोत्तर और तीन हिमालयी राज्यों (जम्मू- कश्मीर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) में 90-10 के आधार पर किया जाता है

 

स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण

 

Swachchh bharat mission
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स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी) व मनरेगा के साथ तालमेल के जरिए या किसी अन्य समर्पित स्रोत से शौचालयों के लिए सहायता (12,000 रू.) का प्रावधान।

इकाई सहायता के अलावा, आवास के निर्माण के लिए मनरेगा के अंतर्गत 90/95 दिनों की अकुशल मजदूरी का प्रावधान।

ग्राम सभा द्वारा लाभार्थियों का निर्धारण और चयन मकानों की कमी और सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी), 2011 के आंकड़ों में दर्शाए गए अन्य सामाजिक अपवर्जन मानदण्डों के आधार पर।

इस कार्यक्रम के तहत निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति में तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय तकनीकी सहायता एजेंसी (एनटीएसए) की स्थापना जो पीएमएवाई-जी के लाभार्थी को, वित्तीय सहायता के अलावा, मकान के निर्माण में तकनीकी सहायता भी मुहैया कराई जाएगी।

यदि लाभार्थी चाहे तो उन्हें वित्तीय संस्थाओं से 70,000 रू. तक की ऋण सुविधा उपलब्ध कराने में मदद की जाएगी।

 

अधिकार-प्राप्त समिति के अनुमोदन पश्चात ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा विशेष परियोजनाएं मंजूर की जाएंगी।  बुनियादी सुविधाओं अर्थात शौचालय, पेयजल, बिजली, स्वच्छ व एफिसिएंट इंधन, ठोस और तरल अपशिष्ट का शोधन इत्यादि की व्यवस्था के लिए अन्य सरकारी योजनाओं के साथ तालमेल करना।

लाभार्थियों के बैंक/ डाकघर खातों में इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सभी तरह का भुगतान किया जाएगा, जिसमें वे खाते भी शामिल हैं जिनमें उनकी सहमति से आधार संख्या की समबद्धता कर दी गयी है।

पीएमएवाई-जी के संबंध में लाभार्थियों को आवश्यक जानकारी (ओरियेंटेशन) उपलब्ध कराना।

स्थानीय सामग्रियों, डिजाइनों और प्रशिक्षित राजमिस्त्रियों का उपयोग करते हुए लाभार्थियों द्वारा अच्छे आवास के निर्माण पर ध्यान देना।

जहां कहीं भी संभव हो वहां ग्राम पंचायत, ब्लॉक या जिले को इकाई मानते हुए सेचुरेशन दृष्टिकोण अपनाना। वित्तीय प्रबंधन और लक्ष्य 3.1 योजना लागत का वहन

वर्ष 2018-19 तक एक करोड़ मकानों के निर्माण के लिए पीएमएवाई-जी कार्यक्रम की कुल लागत 1,30,075 करोड़ रु. है। इस लागत का वहन केंद्र और राज्य सरकारों के बीच 60-40 के आधार पर किया जाएगा। पूर्वोत्तर राज्यों और तीन हिमालय राज्यों अर्थात जम्मू व कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के मामले में यह अनुपात 90:10 है। संघ शासित क्षेत्रों के मामले में पूरी लागत का वहन केंद्र सरकार करेगी। ख. कार्यक्रम की कुल लागत में केंद्रीय अंश 81,975 करोड़ रू. होगा जिसमें से 60,000 करोड़ रू. की पूर्ति बजटीय सहायता से की जाएगी और शेष 21,975 करोड़ रू. की पूर्ति राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से ऋण लेकर की जाएगी जिसका परिशोधन 2022 के बाद बजटीय अनुदान से किया जाएगा। 3.2 योजना निधियों का आवंटन क. पीएमएवाई-जी के अंतर्गत वार्षिक प्रावधान से

 

95 प्रतिशत निधियां राज्यों/सं.शा.क्षेत्रों को इस योजना के अंतर्गत नए मकानों के निर्माण के लिए आवंटित की जाएंगी जिसमें प्रशासनिक खर्च के लिए दिया गया 4% आवंटन शामिल होगा। बजट अनुदान का 5 प्रतिशत केंद्रीय स्तर पर विशेष परियोजनाओं के लिए आरक्षित निधि के रूप में रखा जाएगा। ख. राज्यों/सं.शा.क्षेत्रों को दिया जाने वाला वार्षिक आवंटन ग्रामीण विकास मंत्रालय की अधिकार प्राप्त समिति द्वारा अनुमोदित वार्षिक कार्य योजना पर आधारित होगा। वर्ष 2016-17 से 2018-19 तक तीन वर्षों में राज्य/सं.शा. क्षेत्र-वार बनाए जाने वाले मकानों की कुल संख्या का निर्धारण राज्यों/सं.शा.क्षेत्र में ग्राम सभा/विलेज सभा या संबंधित राज्य/सं.शा.क्षेत्र पंचायत अधिनियम द्वारा मान्यता प्राप्त स्थानीय स्व-शासन की सबसे निम्नतम इकाई द्वारा जाँच प्रक्रिया पूरी हो जाने के पश्चात किया जायेगा। मंत्रालय द्वारा सूचित तीन वर्षों के लक्ष्य में से राज्य/सं.शा.क्षेत्र द्वारा वार्षिक लक्ष्य प्रस्तावित किया जा सकता है।

 

प्रिय पाठकों यह जानकारी मैने प्रधानमन्त्री आवास योजना ग्रामीण के आफिशियल वेबसाइट से लिया है। अगर शब्दों में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना करना पड़ा हो तो मै इसके लिये क्षमा प्रार्थी हूँ।

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